एमआर कैंपेन की तरह करें एमडीए में सहयोग: सीएमओ

एमआर कैंपेन की तरह करें एमडीए में सहयोग: सीएमओ 



  • 17 से 29 फरवरी तक प्रस्तावित है फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए अभियान

  • मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में अभियान के बारे में दी गयी विस्तार से जानकारी


गोरखपुर, 15 फरवरी।


मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने जनपद के लोगों और खासतौर से मीडिया से अपील की है कि वह फाइलेरिया उन्मूलन के मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कैंपेन में मीजेल्स-रुबेला कैंपेन की तर्ज पर सहयोग करें। वह नवीन मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय स्थित प्रेरणा श्री सभागार में शनिवार को आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला 17 फरवरी से 29 फरवरी तक प्रस्तावित एमडीए कैंपेन के लिए आयोजित की गयी।


मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि एमआर कैंपेन में गोरखपुर पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा था। इसके पीछे मीडिया के सकारात्मक सहयोग की अहम भूमिका रही। इस साल एमडीए कैंपेन में विश्व स्वास्थ्य संगठन भी विभाग का सक्रिय सहयोग कर रहा है। प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं योगदान के लिए आगे आई हैं। अभियान के दौरान प्रत्येक आशा कार्यकर्ता 25 घरों में जाएगी और अपने सामने फाइलेरिया की दवा खिलवाएंगी। लोगों को दवा का महत्व बताया जाना चाहिए ताकि इस बीमारी का दंश किसी को भी न झेलना पड़े। 
उन्होंने यह भी बताया कि 16 फरवरी को जनपद  के  सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर  आयोजित हो रहे मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में  MDA 2019-20 कार्यक्रम का उदघाटन कराया जायेगा तथा मेले में आये हुये लोगों को उसी दिन आयु वर्ग के अनुसार DEC एवं एल्बेंडाजोल का सेवन आवश्यक रूप से कराया जाएगा।  मेले में बैनर, पोस्टर, लीफ्लेट्स के माध्यम से अभियान के प्रचार -प्रसार का भी निर्देश दिया गया है। 17 फरवरी  से टीम द्वारा घर -घर जा कर माइक्रोप्लान के अनुसार दवा खिलाई जायेगी।
      कार्यशाला में एसीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय और विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल प्रोग्राम कोआर्डिनेटर डॉ. सागर ने मीडिया के सवालों का जवाब दिया और उन्हें फाइलेरिया से संबंधित विस्तार से जानकारी दी।


गोरखपुर में फाइलेरिया का हाल


गोरखपुर जनपद फाइलेरिया की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में फाइलेरिया के 5500 रोगी है जिनमें पंद्रह सौ हाइड्रोसील के मरीज हैं। डीएमओ ने बताया कि क्यूलेक्स नामक मच्छर वाउचेरिया ब्राक्फटाई नामक पैरासाइट का संक्रमण मरीज से स्वस्थ व्यक्ति में करता है। यह फाइलेरिया का वाहक है जो गंदगी में पाया जाता है। इसके पैरासाइट्स 20 साल तक शरीर में पड़े रहते हैं। अगर पांच साल तक डाईएथाइल कार्बामाजिन साइट्रेट (डीईसी) नामक दवा ( आयु वर्गानुसार ),1 गोली एल्वेंडाजोल (कृमि नाशक दवा) के साथ सेवन किया जाए तो इस बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है।


उम्र के हिसाब से खिलाई जाएगी दवा


दो से पांच वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की 100 मिग्रा की एक गोली और एल्वेंडाजोल की 400 मिग्रा की एक गोली खिलाई जाएगी।


5 से 15 वर्ष तक के बच्चों व किशोरों को डीईसी की 200 मिग्रा की दो गोली और और एल्वेंडाजोल की 400 मिग्रा की एक गोली खिलाई जाएगी।


15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की 300 मिग्रा की तीन गोली जबकि एल्वेंडाजोल की 400 मिग्रा की एक गोली खिलाई जाएगी।


फाइलेरिया को जानें



  • फाइलेरिया को हाथी पांव नाम से भी जानते हैं। यह क्यूलेक्स नामक मादा मच्छर के काटने से होता है।

  • इसके परजीवी 5 से 15 साल तक आदमी के शरीर में जिंदा रहते हैं। शरीर के जिस हिस्से में ये मर जाते हैं वहां सूजन शुरू हो जाता है।

  • पैर में सूजन, हाइड्रोसील, हाथ में सूजन, महिलाओं के स्तन में सूजन इसके लक्षण है।

  • दवा खाने पर एक साल के लिये फाइलेरिया से प्रतिरक्षित हो जाते हैं।

  • पांच साल तक लगातार दवा खाने पर आप हमेशा के लिये प्रतिरक्षित हो जाते हैं।


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