मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे लोग शहज़ादी चौबोली की दास्तान 

पहला दिन : अंतिम सत्र : दास्तानगोई



मंत्रमुग्ध हो सुनते रहे लोग शहज़ादी चौबोली की दास्तान


खचाखच भरा प्रेक्षागृह। मंच पर सफेद चादर और मसनद, अंगरखे में दास्तानगो, पानी के कटोरे और जलती मोमबत्तियां । मंच पर दुनिया भर में दास्तानगोई की अपनी अनूठी शैली के लिए मशहूर किस्सागो महमूद फारूकी और दौरेन शाहिदी। और किस्सा शहज़ादी चौबोली का। स्वाभाविक था कि ये शाम यादगार होती। हुई भी।



प्रस्तुति से पहले मशहूर चिकित्सक डॉ अजीज अहमद ने दास्तानगोई की परंपरा के बारे में दो शब्द कहे और उसके बाद मंच पर ये दोनों नामचीन कलाकार मौजूद थे।
महमूद फारूकी और दारेन शाहिदी ने चर्चित रचनाकार विजयदान देथा की कहानी- ‘चौबोली’ सुनायी, तो दर्शकों के सामने भाषा आड़े नहीं आयी.  जाहिर है राजस्थानी लोक कहानी ‘चौबोली’ को आधार बनाकर 'दास्तान शहजादी चौबोली' की मंच पर प्रस्तुति होगी, तो लोक रंग और राग तो उसमें आयेंगे ही. 


इस दास्तान में अमरबेल की तरह एक कहानी की डाल पर दूसरी, दूसरी के ऊपर तीसरी, तीसरी के ऊपर चौथी कहानी रची-बसी है और दर्शक-श्रोता की उत्सुकता इस बात को जानने में हमेशा रहती है कि आगे क्या? बीच बीच में दोनों कलाकार चुटीले अंदाज़ में दर्शकों और श्रोताओं को हंसाते भी रहे। रिझाते भी रहे। शाम निर्बाध बढ़ती रही। इस यादगार महफ़िल का बेहतरीन संचालन सुप्रसिद्ध उद्घोषक डॉ मुमताज़ खान ने किया। कलाकारों का अभिनंदन श्रीमती अरुणा यादव और डॉ त्रिलोक रंजन ने किया।