'एक शाम गंगा जमुनी तहजीब के नाम'

 


'एक शाम गंगा जमुनी तहजीब के नाम'


दिव्यांगता: कामयाबी से चुनौतियों का सफर


कवि सम्मेलन एवं मुशायरा


गोरखपुर। सेवा फाउंडेशन एवं मसीहा वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में एक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन एक शाम गंगा जमुनी तहजीब के नाम का आयोजन सभागार सीआरसी सीतापुर आई हॉस्पिटल , गोरखपुर में किया गया। 
जिसमें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० नंदकुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांग, चुनौतियों से कामयाबी का सफर जो आपकी पहल है उसकी जितनी भी सराहना की जाए वह कम है क्योंकि इंसान अपने मानसिक तौर पर दिव्यांग हो सकता है और शारीरिक तौर पर नहीं इसके कई उदाहरण मिलते हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एनके पांडे ने आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी और साथ ही साथ कहा की छुपी हुई प्रतिभा को अपना असर दिखाने का मौका मिलता है इस तरह के आयोजनों से इसकी जितनी भी सराहना की जाए वह कम होगी।


वही कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्व प्रसिद्ध शायर व संचालक डॉक्टर कलीम कैसर में कहां की नागफनी के जंगल में आपने गुलाब खिलाने का काम किया है इस आयोजन के माध्यम से जब लोग एक दूसरे से नफरत कर रहे हो ऐसे में हिंदी और उर्दू भाषाओं के लोग मिलकर के मोहब्बत की बात कर रहे हैं इससे बढ़कर क्या हो सकता है।



कार्यक्रम का संचालन करते हुए युवा शायर एवं समाजसेवी मिन्नत गोरखपुरी जैसे ही दिव्यांगता को चुनौती देते हुए पंक्तियां पढ़ी और कार्यक्रम की शुरुआत की लोगों ने खूब तालियां बजाई।
सारे रिश्तों का तमाशा देखते
आंखें होती तो ये दुनिया देखते
ठीक है आंखें नहीं हैं मेरे पास
वरना बस अपना प्रायः देखते
                    -मिन्नत गोरखपुरी
इसी क्रम में........
किसी के काम आ जाऊं यही ईमान रखता हूँ ,
बिखरूं फिर सिमट जाऊं यही उन्वान रखता हूँ ।
सदा ही साथ चलने की कसम खाई जो हमने है,
तेरी किस्मत बदल जाऊं यही अरमान रखता हूँ ।।
              -डॉ आर के राय  "अभिज्ञ" 


ए परिंदे तेरे हौसले की क्या दाद दूँ,उड़ ले तेरा पूरा आसमान है ।
मगर सुन ले मुझमें पर नहीं हौसले  हैं, उड़नें के लिए पूरा हिन्दुस्तान है। 
                            -सौम्या यादव



हौसलों में उड़ान रखते हैं।
हम भी इक आसमान रखते हैं।
हमको माज़ूर न समझा जाए।
हम भी अपना जहान रखते हैं।                                   
                          -लाएब नूर
कभी इनके मनोबल को बढ़ा करके देखिये, फौलाद इरादों को जगा करके देखिये, है तन पे भारी मन इन्हें कहते हैं दिव्यांग, ये मन के सिकंदर हैं,  लड़ा करके देखिये
                       -वेद प्रकाश पाठक
मेरे ग़म को अपना बनाओ तो कोई बात बने, दो कदम तुम भी साथ निभाओ तो कोई बात बने,
हसना तो दुनिया की रीत है वो तो हसेगी तुम पर, मगर तुम रो कर भी मुस्कुराओ तो कोई बात बने। 
                               -कुँवर विनम्र
तेरी चाहत में मैं भी सँवर जाऊँगी।
टूटकर वरना मैं तो बिखर जाऊँगी।।
ये ज़माना  मुझे  लाख  रोके  मगर।
तुम रहोगे  जिधर मैं उधर जाऊँगी
                           -प्रतिभा गुप्ता
इसी क्रम में नुसरत अतीक, मुजीब सिद्दीकी, उदयवीर सिंह, नसीरुद्दीन नासिर, अनन्या सिंह, अंकुर सच्चर  ने भी अपनी रचनाएं, कविता और शायरियां सुनाएं और श्रोताओं का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ मुस्तफा खान ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। सहसंयोजक अमरनाथ जायसवाल ने अतिथियों के साथ साथ सीआरसी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी के सहयोग से यह आयोजन हो सका है और स्वच्छता पखवाड़ा के तहत कई लोगों को सम्मानित करने का अवसर मिला है।
इस अवसर पर डॉक्टर सत्या पांडे, पूजा जायसवाल, आशीष रुंगटा, विजय कुमार श्रीवास्तव, खैरुल बशर, सुधीर कुमार झा, अरशद अहमद, सरदार जसपाल सिंह, प्रवीण श्रीवास्तव,राज शेखर आदि उपस्थित रहे।